International Journal of Multidisciplinary Education and Research


ISSN: 2455-4588

Vol. 4, Issue 5 (2019)

श्रीकांत वर्मा की आरंभिक कविताओं की जीवन दृष्टि

Author(s): डॉ. अमिय कुमार साहु
Abstract: श्रीकांत वर्मा साठोत्तरी कविता के बहु-चर्चित और विवादास्पद कवि रहे हैं। इसके दो कारण हैं- एक तो कविता में नया प्रयोग और दूसरा राजनीति में उनकी हिस्सेदारी। उनकी आरंभिक कविता और बाद की कविताओं का स्वर एक-दूसरे के विरोधी हैं। उनकी पहले-पहल की कविताओं में जहां आस्था का भरमार दिखाता हैं, वहाँ बाद की कविताएं घुटन, निराशा, कुंठा से भरी हुहुई है। पर ये घुटन, निराशा, कुंठा एक रचनात्मकता के साथ सामने आती है। उनकी पूरी कविताओं के मर्म को समझने के लिए, उनकी आरंभिक कविताओं की जीवन दृष्टि को समझना बहुत ही आवश्यक है। इस शोध-लेख का उद्देश्य भी यही है।
Pages: 70-72  |  118 Views  25 Downloads
library subscription