International Journal of Multidisciplinary Education and Research


ISSN: 2455-4588

Vol. 2, Issue 3 (2017)

संस्कृत काव्यो मे रामकथा

Author(s): डॉ0 सीमा सिंह
Abstract: संस्कृत महाकवियो की दीर्घ्र परम्परा में शायद ही कोई कवि ऐसा हुआ हो जिसने अपनी कृतियो के लिये रामायण के कतिपय प्रसंगो को उपजीव्य के रूप में ग्रहण न किया हो। रामायण उपजीव्य काव्य के रूप मे अनेक कवियो का आश्रय बना। मानव मूल्यों के अंकन मे काव्य के सूचारू आदर्श के चित्रण मे, जीवन को उदात्त बनाने की कला में तथा सत्यम शिवम सुन्दरम के मधुमय सामंजस्य में वाल्मीकि की वाणी विश्व के समक्ष एक अनुपम आदर्श प्रस्तुत कर पाठको के हृदय को सदा आनन्दित करती रहेगी। महर्शि वाल्मीकि साहित्य जगत के ही आदि कवि नही, प्रत्युत भारतीय संस्कृति के संस्कारक मनीशी भी है। रामायण उपजीव्यकाव्य के रूप मे अनेक कवियो का आश्रय बना काव्य तथा नाटको को विशय देने के लिये रामायण ऐ अक्षुण्ण स्रोत है। संस्कृत कवियों नें रामायण की मूल कथा मे कूछ परिर्वतन करते हुये, कुछ मौलिकताओ को जोड़ते हुये रामकथा को एक नया रूप देते हुये पाठको के समक्ष प्रस्तुत किया है। कवियो ने अपने-अपने काव्यो मे रामायण के मूल कथा मे कहाॅ परिर्वतन किया है, मौलिकताओं को जोडा़ है और अत्यधिक चमत्कारिक रूप देने का जो प्रयास किया है यही शोध पत्र का विषय है। शोधपत्र मे क्रमवार इनका वर्णन किया जायेगा।
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