International Journal of Multidisciplinary Education and Research


ISSN: 2455-4588

Vol. 1, Issue 9 (2016)

उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के विज्ञान समूह के छात्र-छात्राओं की संवेगात्मक बुद्धि व तार्किक योग्यता का अध्ययन

Author(s): महेन्द्र मणि तिवारी, डाॅं0 जय सिंह
Abstract:
बच्चों का संवेगात्मक वातावरण, उसके व्यक्तित्व के भावात्मक तत्व और निश्चित पदार्थो, व्यक्तियों और परिस्थितियों के प्रति उसके भाव से निर्मित होता है। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है और विकसित होता है, उसके अनुभव तथा ज्ञान की सीमा विस्तृत होती हो जाती है, उसकी अन्योन्यक्रिया बढ़ती जाती है र्तथा उसे प्रभावति करने वाले व्यक्तियों की संख्या भी बढ़ती जाती है। अपने माता-पिता, मित्र, भाई-बहन, शिक्षक और अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों से उसके पारस्परिक संबंध् और उनके प्रति अपनी संवेदनाओं के द्वारा ही बच्चा प्रमुख रूप से निर्देशित होता है।
संवेगात्मक विकास, संज्ञानात्मक विकास या नैतिक विकास की तरह प्रातीकात्मक चरणों या पथों का अनुसरण नहीं करता है। इसी प्रकार कोई संवेगात्मक आयु, मानक या संवेगात्मक ग्रहणीकरण की विशिष्ट प्रक्रिया नहीं होती है। उदाहरणार्थ - एक माँ जो अपने बच्चे को आज्ञा - उल्लंघन करने की सजा देती है, तो यह व्यवहार बच्चे में दो अलग-अलग प्रकार के संवेग उत्पन्न करता है। यदि बच्चे और माँ का संबंध् स्नेहपूर्ण तथा सुरक्षित है तो वह सजा के प्रति प्रतिक्रिया नहीं व्यक्त करेगा और माँ का दिया हुआ दण्ड सहर्ष स्वीकार करेगा परंतु वह बच्चो जो अपनी माँ के साथ सुरक्षा का भाव महसूस नही करता वह हिंसक रूप से प्रतिक्रिया व्यक्ति करेगा और अपनी माँ के प्रति बहुत तीव्र घृणा का भाव विकसित कर सकता है।
शोध क्षेत्र के उच्चतर माध्यमिक स्तर के विज्ञान समूह के छात्रों की संवेगात्मक बुद्धि की औसत उपलब्धि 32.10 तथा मानक विचलन 8.64 है तथा छात्राआंे की औसत उपलब्धि 32.70 तथा मानक विचलन 8.35 है। शोध क्षेत्र के उच्चतर माध्यमिक स्तर के विज्ञान समूह के छात्रों की तार्किक योग्यता की औसत उपलब्धि 31.20 तथा मानक विचलन 9.46 है तथा छात्राआंे की औसत उपलब्धि 32.70 तथा मानक विचलन 8.59 है।

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